पटना के शंभू हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर जहां जनसुराज के संरक्षक प्रशांत किशोर ने पटना एसएसपी से मुलाकात कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग उठाई है।
प्रशांत किशोर ने एसएसपी से मुलाकात के दौरान आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और घटना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की मांग की। पीके ने कहा कि इस दुखद घटना के खिलाफ कारगिल चौक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर केस दर्ज करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि एसएसपी ने इस मामले को गंभीरता से देखने का आश्वासन दिया है।
आरजेडी की बैठक, अपराध और संगठन पर मंथन
इधर, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने आवास पर आरजेडी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक की। उजियारपुर के विधायक आलोक मेहता ने बताया कि बैठक का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और बिहार में बढ़ती आपराधिक घटनाओं पर चर्चा करना था। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्हें धैर्य के साथ आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार रहने का संदेश दिया गया।
मधेपुरा से विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि पार्टी का जनाधार मजबूत है और वोटों की कमी नहीं है। जहां भी चूक हुई है, उसकी समीक्षा की गई है और आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बजट सत्र के बाद तेजस्वी यादव जनसंपर्क यात्रा पर निकलेंगे।
अपराध की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया
आरजेडी नेता और परबत्ता के पूर्व विधायक डॉ. संजीव ने कहा कि बैठक में संगठन के साथ-साथ राज्य में बेलगाम अपराध पर गंभीर चर्चा हुई। उन्होंने हाल ही में खगड़िया में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और पटना के शंभू हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत का जिक्र करते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।
डॉ. संजीव ने कहा कि पहले दावा किया गया कि छात्रा की मौत जहर खाने से हुई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बावजूद पुलिस की कार्रवाई अपेक्षित स्तर की नहीं रही। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच हो, क्योंकि इसमें कई लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है।
SIT जांच पर बोले प्रशांत किशोर
प्रभात मेमोरियल अस्पताल को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशांत किशोर ने कहा कि जांच का काम जांच एजेंसियों का है। सरकार ने पटना आईजी के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया है, इसलिए जांच को निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ने दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि पीड़ित परिवार की मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया गया है और परिवार का कहना है कि एक महिला पुलिस अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है, जिसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
इस पूरे मामले ने बिहार की कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्यशैली को लेकर एक बार फिर सियासी बहस को तेज कर दिया है।